गुरुवार, 22 नवंबर 2018

मांझी और तूफान

डगमग डोंगी करे, मगर मन अचल रहे, तूफानों के बीच, मांझी अटल रहे! मंजिल की ले चाह जूझता रहे निरंतर, डटा रहे पतवार लिए, हो बीच समंदर। ऐसे मांझी से, हर मौजें मात खाएंगी, दूर किनारे तक, खुद उसको पहुंचाएंगी। - सिद्धार्थ मौर्य 'शरद' 29 जून 2014 को।

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