सोमवार, 8 जनवरी 2024

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है..!

 



माँ,  नौ महीने पालती है 

पिता, 25 साल पालता है 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ, बिना तानख्वाह घर का सारा काम  करती है 

पिता, पूरी कमाई घर पे लुटा देता है 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ ! जो चाहते हो वो बनाती है 

पिता ! जो चाहते हो वो ला के देता है 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ ! को याद करते हो जब चोट लगती है 

पिता ! को याद करते हो जब ज़रुरत पड़ती है 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ की और बच्चों की अलमारी नये कपड़े से भरी है 

पिता, कई सालो तक पुराने कपड़े चलाता है 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


पिता, अपनी जरूरतें टाल कर सबकी जरूरतें समय से पूरी करता है

किसी को उनकी जरूरतें टालने को नहीं कहता 

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


जीवनभर दूसरों से आगे रहने की कोशिश करता है मगर हमेशा परिवार के पीछे रहता है, शायद इसीलिए क्योकि वो पिता है । 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मां बनाती थी रोटी...

 माँ बनाती थी रोटी  पहली गाय की  आखरी कुत्ते की  एक बामणी दादी की  एक मेहतरानी बाई की  ...  हरसुबह सांड आ जाता  दरवाज़े पर  गुड की डली के लि...